AICC Head Office In New Delhi.3

नई दिल्ली स्थित आल इंडिया कांग्रेस कमेटी पार्टी मुख्यालय में काफी समय के बाद शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई ,जिसमे पार्टी के संगठन को कैसे मजबूत किया जाये इस पर चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत सोनिया गाँधी के ओपनिंग भाषण से हुई जिसमे उन्होंने G-23 के असंतुष्ट नेताओं को जवाब दिया कि में ही कांग्रेस की फुल टाइम पार्टी अध्यक्ष हूं और में ही कांग्रेस पार्टी के फैसले लेती हूँ। सोनिया गाँधी ने कहा किसी भी नेता को मीडिया के माध्यम से मुझसे बात करने की कोई जरूरत नहीं है, कुछ दिन पहले G-23 के असंतुष्ट नेता कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि कांग्रेस पार्टी के फैसले कौन लेता है मेरे को नहीं पता।

वही पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भी इस बैठक में तय हुआ कि कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव 21 अगस्त 2022 से 28 सितंबर 2022 के बीच होगा। सोनिया गाँधी ने कहा कि पूरा संगठन कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना चाहता हैं। इसके लिए एकता और पार्टी हितों को सबसे ऊपर रखना हैं। उन्होंने पार्टी नेताओ से अनुशासन का ख्याल रखने को भी कहा हैं। इस बैठक में राजनीतिक, आर्थिक और किसानों पर हमले को लेकर तीन प्रस्ताव पास किए गए हैं।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी(CWC) की बैठक में राहुल गाँधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग उठी

सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राहुल गाँधी को भी पार्टी का अध्यक्ष बनाने के मांग उठी। बैठक में सबसे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने राहुल गाँधी को  पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग की। इसके बाद पंजाब ,छत्तीसगढ़ और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी सहित कई कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ ने राहुल गाँधी से पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने का आग्रह किया है इसके बाद रहल गाँधी ने भी अपना उत्तर दिया की वो इस पर विचार करेंगे।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी(CWC) की बैठक में सोनिया गाँधी ने मोदी सरकार पर भी जमकर हमला बोला –

1- सोनिया गाँधी ने कहा कि लखीमपुर -खीरी  की भयावह घटना  भाजपाई मानसिकता को उजागर करती है कि वो किसान आंदोलन को कैसे देखती हैं।

2– मंहगाई को लेकर कहा कि किसी ने नहीं सोचा होगी कि पेट्रोल १०० रुपए पार ,डीजल १०० रुपए के आसपास, गैस सिलेंडर ९०० रुपए से अधिक और खाना पकाने का तेल २०० रुपए पार चला गया हैं। इससे देशवासियो कोजीवन यापन करने में असहनीय  पीड़ा हो रही हैं।

3- विदेशी नीति को लेकर भी हमला बोला और कहा कि विदेश नीति चुनावी संचालन और धार्मिक धुर्वीकरण का एक द्वेषपूर्ण जरिया बन गयी हैं। हम अपनी सीमाओं और अन्य मोर्चो पर गंभीर चुनोतियो का सामना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले साल विपक्ष को बताया था कि चीन ने हमारे क्षेत्रपर कोई कब्ज़ा नहीं किया हैं और तब से उनकी चुप्पी देश को महंगी पड़ रही हैं।

4- सोनिया गाँधी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यकों की हुई हत्याओ को लेकर भी मोदी सरकार को आड़े हाथो लिया और कहा इन बर्बर अपराधों के अपराधियों को न्याय दिलाने की पूरी जिम्मेदारी मोदी सरकार की हैं। इसके लिए जम्मू -कश्मीर में लोगो के बीच सामाजिक शांति ,सद्भाव और विश्वास बहाल करना चाहिए

5- सहकारी संघवाद को लेकर भी निशाना साधा,सहकारी संघवाद केवल एक नारा बनकर रह गया हैं और केंद्र सरकार गैर-भाजपाई शासित राज्यों को नुकसान पहुंचाने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं।

6- राष्ट्रीय सम्पति को बेचना सरकार का एकमात्र लक्ष्य हैं जिसे पिछली सरकारों ने दशको की कड़ी मेहनत से बनाया था ,सरकार के पास आर्थिक सुधारो को एकमात्रा रास्ता लग रहा हैं। बेचो ,बेचो ,राष्ट्रीय सम्पति को बेचो।

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